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मोतिहारी में अश्वमेघ यज्ञ

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पूर्वी चंपारण जिला की भूमि पर एक नए इतिहास की नींव रखने की शुरुआत हो रही है।रामराज्य के बाद कलियुग में “अश्वमेघ महायज्ञ” की तैयारियां मोतिहारी की धरती पर चल रही है।अश्वमेघ महायज्ञ को लेकर आ रही वैदिक और सैद्धांतिक अड़चनों को दूर करते हुए सुमेरु पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने आज्ञा दे दी है और सुमेरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती इस महायज्ञ का शुभारंभ करेंगे।मोतिहारी के सीकारिया बीएड कॉलेज के प्रांगण में होने वाले “अश्वमेघ महायज्ञ” को लेकर चांदी और सोना से निर्मित प्रतिकात्मक अश्व भी तैयार है।जिसकी जानकारी समाजसेवी डॉ. शंभूनाथ सीकारिया ने दी और धातु के प्रतिकात्मक अश्व को प्रदर्शित किया।

शिक्षाविद् डॉ. शंभूनाथ सीकारिया ने बताया कि अश्वमेघ महायज्ञ एक अप्रैल से 10 अप्रैल तक होगा।उन्होंने बताया कि अश्वमेघ महायज्ञ को लेकर चार अड़चने थी।जिसमें घोड़ा को लेकर मुख्य अड़चन आ रही थी।लेकिन वर्तमान प्रजातांत्रिक परिस्थिति में धातु के अश्व पर निर्णय हुआ।जिसके लिए चांदी निर्मित अश्व पर सोना का परत चढ़ाया गया है।जो वाहन द्वारा विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगा।भ्रमण के पश्चात वापस लौटे अश्व का अग्नि साक्षात्कार कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी और उसे स्थापित कर दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि अश्वमेघ महायज्ञ का संचालन विभिन्न धार्मिक स्थलों से आए 108 आचार्य करेंगे।

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